Sunday, September 2, 2018

डफली बजाए जा


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मानवीय समीपताओं की तलाश करती कहानियॉ-

       ‘डफली बजाये जा’ कहानी संग्रह

‘डफली बजाये जा’ संग्रह की सभी कहानियॉ डफली की थाप से निकलने वाली सुरम्य आवाज़ एक तरफ निराशा के दमघोंटू कुहांसे से मुक्त होने का सन्देश देती हैं तो दूसरी तरफ संवेदनाओं के सात्विक भाव से मानवता को पुष्पित पल्लवित कर करने की पूरी कोशिश करती हैै। आज जीवन के हर पक्ष पर अंधकार का संक्रमण है। ‘डफली बजाये जा’ कहानी संग्रह की ये कहानियां हिन्दी साहित्य पर छा रहे कुहासे में एक अदत चिराग जलाने की भूमिका अदा करने के साथ ही वैचारिक द्वन्द के पश्चात सार्थक राह सुझाने में समर्थ हैं। संग्रह की कहानियॉ ग्रामीण जीवन के यथार्थ को नये शिल्प व शैली में प्रस्तुत करती है। संग्रह में कुल बारह कहानियॉ ‘डफली बजाये जा’ हम तुम्हें खोना नहीं चाहते कामरेड,वापसी लिफाफा, मैं उगती नहीं पार्टनर, दोस्त की चन्द्रकांता, साले बन्द कर किस्सा कहानी, समृति दंश, इस शहर में कभी रहते थे हबीब भाई, स्मृति दंश, जागरण, अजीब है दिल्ली, आखिर क्या है निशा का पक्ष जैसी कहानियॉ संग्रहीत है जो समय से संवाद करती हुई हैं तो समय के साथ संघर्ष भी करती हैं। प्रस्तुत कहानियॉ सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक मानवीय संबधों का लेखा जोखा प्रस्तुत करने के साथ साथ हर हाल में मानवीय समीपतायें बनाये रखने के लिए सार्थक व परिणामकारी परिवेश का निर्माण भी करती चलती हैं। 
इन कहालियों के विषय वस्तु पूरी तरह से ग्रामीण हैं, उन विषयों में लोक-संस्कृति तथा लोक मन का काव्यात्मक भाषा में वर्णन प्रभावित करता है जिसे पढ़ते हुए तथा उन्हें आत्म सात करते हुए किसी खास लम्बी कविता का आभास होता है। कथा संग्रह अनिवार्य रूप से पड़ा जाना चाहिए। 
प्रकाशक- पिलग्रिम्स प्रकाशन
बी.27/98-ए-8, दुर्गाकुण्ड, वाराणसी, 221010  मूल्य....150.00



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