Saturday, June 30, 2012

विचारो के पौधे रोपना चाहता हू कियारियो में 
पर उन्हें सीचने के लिए 
कहा से पाउँगा सुविधाओं का पानी 
यकीन कर लिया जाये अगर कि 
विपरीत परिस्थितयों में भी 
कियारियां , बदचलन मौसम कि उदारताए करा सकती है वर्षात 
भर सकते हैं बंधे, पिछले साल हल्ला मचा था कि नाहर कि नालिया 
छोड़ देंगी परधन को सलाम करना पर क्या ऐसा संभव है?
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.........ख़बरदार जो रिमझिम किये, हमारे गरम मिजाज को नरम किये, देखते नहीं 
पकी फसलों कि दुल्हन बेताब है घर आने के लिए, और तुम उसे करना चाहते हो निर्वस्त्र  
प्रकृति के उपहारों को चाहे जितना 
तोड़ लिया जाये , हासिल कर लिया जाये महारथ,
टुकड़े कर लिए जाये अनुओ के
खोज लिए जाये उर्जा के श्रोत 
और विज्ञानं पीठ पर लड़ कर घूमने लगे आदमी 
देखो यह कर लिया , वह कर लिया 
लगे कहने पर क्या बना पायेगा कोई पहाड़ 
एक नदी, एक पोखर, एक पेड़ या कोई झाडी
यह कैसा ज्ञान है भाई?

Friday, June 29, 2012

मजहबो  में जकड़े है इन्सान  किस लिए 
वीरान  वस्तियो  में  है मकान  किस लिए  
बुतों  से है  नफरत और  कब्रों से मुहब्बत
दिए जलेगे  इन पर तो भगवन किस लिए 
मंदिर और मस्जिद तो इबादत के लिए है
इनमे  जलेंगे लोग तो  श्मशान किस लिए 
हथियार  ही से  होंगे दिलों  के  फैसले  तो 
गूंगे  को  चाहिए  फिर  जुबान किस लिए 
हमें रोटिया ही दीजिये बहुत भूख लगी है 
दे  रहे  है  गीता  और  कुरान  किस लिए