Friday, June 29, 2012

मजहबो  में जकड़े है इन्सान  किस लिए 
वीरान  वस्तियो  में  है मकान  किस लिए  
बुतों  से है  नफरत और  कब्रों से मुहब्बत
दिए जलेगे  इन पर तो भगवन किस लिए 
मंदिर और मस्जिद तो इबादत के लिए है
इनमे  जलेंगे लोग तो  श्मशान किस लिए 
हथियार  ही से  होंगे दिलों  के  फैसले  तो 
गूंगे  को  चाहिए  फिर  जुबान किस लिए 
हमें रोटिया ही दीजिये बहुत भूख लगी है 
दे  रहे  है  गीता  और  कुरान  किस लिए 

No comments:

Post a Comment