लोग जले कितने कितने घर कहो
ताजी खबर को दोस्त बासी खबर कहो
सुना था तेरे घर में आग लगी थी
बाख गए हो तो तुम खुदा का असर कहो
शोषित सभ्यता के प्रतीकों से पूछ कर
फिर बता , हो इधर या की उधर कहो
सुकरात की मौत अगर याद है तुम्हे
फिर तो बात दोस्त हो कर, निडर कहो
गरीबों में गरीबी की अगर भीख जगा दो
होगा नहीं मुस्ग्किल फिर सफ़र कहो
अमीरी और गरीबी सब खुद की फज़ल से
यह बात हो चुकी है अब बे असर कहो
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