Monday, February 4, 2013


लोग   जले  कितने   कितने   घर   कहो 

ताजी  खबर  को  दोस्त  बासी खबर कहो

सुना  था  तेरे  घर  में  आग   लगी  थी 
बाख गए हो तो तुम खुदा  का असर कहो 

शोषित  सभ्यता  के  प्रतीकों  से पूछ कर 
फिर बता ,  हो इधर  या की  उधर   कहो 

सुकरात  की  मौत  अगर  याद  है  तुम्हे 
फिर तो  बात दोस्त हो  कर,  निडर कहो 

गरीबों में गरीबी की अगर  भीख जगा  दो 
होगा  नहीं  मुस्ग्किल  फिर  सफ़र  कहो 

अमीरी और गरीबी सब खुद की फज़ल से 
यह बात हो चुकी  है अब  बे  असर  कहो 

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