Wednesday, July 18, 2012
Saturday, July 14, 2012
Friday, July 13, 2012
Thursday, July 12, 2012
kavita
किस तरह के आईने . पहुँच रहे है गाओं कि तरफ खलिहानों की ओर
दिखाने के लिए गालों की झुर्रियां,सिकुड़ने तथा खरोचे भी,
उस आदमी को भी जो कभी था जीवित
जिसे भूख ने तब्दील किया था लाश में
तंत्र कला का अद्भुत नमूना कि विश्वाश तब्दील हो जाये लाश में
chunav ख़तम आईने भी ख़तम
कहा चले गए आईने?
क्या हुआ उन्हें? कहाँ गढ़े जाते हैं आईने हर पाँच साल बाद
कभी कभी बीच में ही
किसिम किसिम के आईने खड़े हैं हर चौराहे पर, हर गली में
आखिर क्या दिखता है उनमे
मक्कारी और धोखे के सिवा
उसमे नहीं दिखाती भूख. गरीबी और बेरोजगारी
तथा विस्थापित और प्रताड़ित दुनिया
कोई जिंदा कौम आखिर कैसे देखे अपनी सूरत चुनावी आईनो में
साफ करने के लिए चहरे के दागो को
जिन्दा कौमे अपना हाँथ भी नहीं देख सकती है उनमे
जिससे उठाये जाते है मशाल
तn जाती है aasman कि ओर मुठिया
Wednesday, July 11, 2012
Saturday, June 30, 2012
विचारो के पौधे रोपना चाहता हू कियारियो में
पर उन्हें सीचने के लिए
कहा से पाउँगा सुविधाओं का पानी
यकीन कर लिया जाये अगर कि
विपरीत परिस्थितयों में भी
कियारियां , बदचलन मौसम कि उदारताए करा सकती है वर्षात
भर सकते हैं बंधे, पिछले साल हल्ला मचा था कि नाहर कि नालिया
छोड़ देंगी परधन को सलाम करना पर क्या ऐसा संभव है?
......................
.........ख़बरदार जो रिमझिम किये, हमारे गरम मिजाज को नरम किये, देखते नहीं
पकी फसलों कि दुल्हन बेताब है घर आने के लिए, और तुम उसे करना चाहते हो निर्वस्त्र
Subscribe to:
Posts (Atom)




