दिखाने के लिए गालों की झुर्रियां,सिकुड़ने तथा खरोचे भी,
उस आदमी को भी जो कभी था जीवित
जिसे भूख ने तब्दील किया था लाश में
तंत्र कला का अद्भुत नमूना कि विश्वाश तब्दील हो जाये लाश में
chunav ख़तम आईने भी ख़तम
कहा चले गए आईने?
क्या हुआ उन्हें? कहाँ गढ़े जाते हैं आईने हर पाँच साल बाद
कभी कभी बीच में ही
किसिम किसिम के आईने खड़े हैं हर चौराहे पर, हर गली में
आखिर क्या दिखता है उनमे
मक्कारी और धोखे के सिवा
उसमे नहीं दिखाती भूख. गरीबी और बेरोजगारी
तथा विस्थापित और प्रताड़ित दुनिया
कोई जिंदा कौम आखिर कैसे देखे अपनी सूरत चुनावी आईनो में
साफ करने के लिए चहरे के दागो को
जिन्दा कौमे अपना हाँथ भी नहीं देख सकती है उनमे
जिससे उठाये जाते है मशाल
तn जाती है aasman कि ओर मुठिया
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