Saturday, January 19, 2013


लोहे के कटघरे  में  जो भी  खड़ा मिला 
यकीनन इस जमी में सोना गड़ा मिला 

सुनहरे अतीत के सपनो का वर्तमान 
सोने  की  कोठरी  में  मुर्दा पडा मिला 

चिताओं या की कब्रों मेंभी  मेरे दोस्त 
आदमी मरा  हुआ  छोटा  बडा   मिला 

उपदेश  की  किताबों  को  क्या   कहें 
भूगोल का नक्शा  काफी सडा  मिला 

जमीदोज हो गयी है सुधारों की आदतें 
अपना  यथार्थ  भी  इतना  कडा मिला 

gazal


अंधेरों  में  मसाल   जला   कर  देखें 
पत्थर पर   हथौड़ा  चला  कर   देखें 

देश सबका है मालिक हैं  सब  इसके 
कैसा   भी  घर  कहीं  बनाकर   देखें 

संसद के आइने में कुछ दिखता  नहीं 
खुद  को  दरिया  में  डुबो  कर   देखें 

भूखो  को  चाहिए  रोटियां   कितनी 
बदजात   अमीरी    हटाकर     देखें 

ज़माने की हवा में  है कितनी  ताकत 
हो सके तो    लोहा    बजाकर   देखें  

Thursday, January 17, 2013

शुक्रवार के जनुअरी अंक में प्रकाशित मेरी कहानी      रिनुवल से रिपोर्ट तक   पढ़े और प्रतिक्रिया दे 
07376900866

Thursday, January 10, 2013

द पब्लिक एजेंडा के अंक 23, 15 जनुअरी 2013 में मेरी कहानी .........
देखिये आगे क्या होता है  प्रकाशित हुई है कृपया उस पर अपनी राय दे , कृपा होगी 
आपका 
शिवेन्द्र    07376900866 काशित